Monday, 14 October 2013

Raj. History

राजस्थान के इतिहास की प्रमुख
घटनाएं - प्रारंभ से
चौदहवीं शताब्दी तक
राजस्थानी
साहित्यकार :
पन्नालाल
कटारिया 'बिठौड़ा''
ढोला मारू की प्रेम
कथा राजस्थान
की प्रशासनिक
इकाईयाँ
राजस्थान की सीमा से
लगने वाले
पड़ोसी राज्य के जिले
तथा ...
आर.ए.एस & आर.टी.एस.
संयुक्त
भर्ती परीक्षा
प्रश्न पत्र का ...
वर्ष महत्तवपूर्ण घटना
5000 ई.पू. कालीबंगा सभ्यता
3500 ई.पू. आहड़ सभ्यता
1000-600 ई.पू. आर्य सभ्यता
300-600 ई.पू. जनपद युग
350-600 ई.पू. गुप्त वंश का हस्तक्षेप
551 ई. वासुदेव चौहान द्वारा सांभर ( सपादलक्ष) में चौहान राज्य
की स्थापना
728 ई. बप्पा रावल द्वारा चित्तौड़ में मेवाड़ राज्य की स्थापना
967 ई. कछवाहा वंशी धोलाराय द्वारा आमेर राज्य की स्थापना
1018 ई. महमूद गजनवी द्वारा प्रतिहार राज्य पर चढाई एवं
विजय
1031 ई. दिलवाड़ में आदिनाथ मंदिर का निर्माण विमलशाह ने
करवाया
1113 ई. अजयराज द्वारा अजमर ( अजयमेरु) की स्थापना
1137 ई. कछवाह वंश के दुलहराय ने ढूंढार राज्य की स्थापना
1156 ई. राव जैसलसिंह द्वारा जैसलमेर की स्थापना
1191 ई. तराईन का द्वितीय युद्ध - पृथ्वीराज व मुहम्मद
गौरी के मध्य, पृथ्वीराज विजयी
1192 ई. तराईन का तृतीय युद्ध - पृथ्वीराज व मुहम्मद गौरी के
मध्य, मुहम्मद गौरी की विजय
1195 ई. मुहम्मद गौरी द्वारा बयाना पर आक्रमण
1213 ई. जैत्रसिंह मेवाड़ में गद्दीनसीन
1230 ई. दिलवाड़ में तेजपाल व वास्तुपाल द्वारा नेमिनाथ मंदिर
का निर्माण
1234 ई. रावत जैत्रसिंह द्वारा इल्तुतमिश पर विजय
1237 ई. रावत जैत्रसिंह द्वारा सुल्तान बलबन पर विजय
1242 ई. राजा हाड़ा देशराज द्वारा बूंदी राज्य की स्थापना
1291 ई. हम्मीर द्वारा जलालुद्दीन का आक्रमण विफल करना
1301 ई. हमीर द्वारा अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण
को विफल करना, षड्यंत्र द्वारा पराजित, रणथम्भौर के
किले पर 11 जुलाई को तुर्की अधिकार स्थापित
1302 ई. रत्नसिंह गुहिलों के सिंहासन पर बैठा
1303 ई. राणा रतनसिंह अलाउद्दीन खिलजी के हाथों परास्त,
चित्तौड़ पर खिलजी का अधिकार , चित्तौड़ का नाम
परिवर्तीत कर खिज्राबाद
1308 ई. कान्हड़देव चौहान खिलजी से परास्त, जालौर पर
खिलजी का अधिपत्य
1326 ई. राणा हमीर द्वारा चित्तौड़ पर पुनः शासन स्थापित

Rajasthani literature

राजस्थान के साहित्य से संबंधित विविध
तथ्य / Trivia of Literature of
Rajasthan
चर्चरी, ढाल, चोडालिया, छःडालिया, पावडा, मंगल, धवल,
बावनी, कुलक, हीयाली, रेलुका व संझाय इत्यादि -
राजस्थानी पद्य साहित्य की विविध विधाएं (शैलियां)
जयसिंह चरित्र - पुंडरिक रत्नाकर
नाथ चरित्र, जलंधर चरित्र व नाथ पुराण - जोधपुर
महाराजा मानसिंह
जोधपुर महाराजा जसवंतसिंह की दो प्रसिद्ध रचनाएं -
भाषा भूषण (अलंकार ग्रंथ) व प्रबोध चंद्रोदय नामक नाटक
प्रतापचरित्र, दुर्गादास चरित्र व रूठी रानी -
केसरीसिंह बारहठ
हाला झाला री कुंडलियां - ईसरदास बारहठ
हम्मीर मदमर्दन - जयसिंह सूरी
ज्ञान समुंद्र - संत सुंदरदास
राणा कुंभा की प्रसिद्ध संगीत विषयक कृतियां - रसिक
प्रिया,संगीत राज व संगीत मीमांसा
अजमेर के चैहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)
का प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक - हरिकेलि
ए प्रिंसेस रिमेंबर्स - महारानी गायत्रीदेवी
ए डिस्क्रेप्टिव केटलाॅग आॅफ दी बार्डिक एंड
हिस्टोरिकल क्रोनिकल्स - एल.पी. तेस्तितोरी
राजपूताने का इतिहास - पं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा
मेवाड़ दिग्दर्शन - बलवंतसिंह मेहता
राजस्थान के लोकानुरंजक - देवीलाल सामर
मेवाड़ प्रजामंडल - मोहनलाल सुखाडि़या
प्रत्यक्ष जीवनशास्त्र - हीरालाल शास्त्री
बोलो माधवी - चंद्रप्रकाश देवल
उसने कहा था - चंद्रधर शर्मा गुलेरी
वर्ष 1954 में प्रकाशित राजस्थानी व्याकरण के लेखक -
सीताराम लालस
राजप्रशस्ति महाकाव्य - रणछोड़दास भट्ट
पदमनाभ द्वारा रचित दो प्रसिद्ध कृतियां - कान्हड़दे
प्रबंध व हमीरायण
एकमात्र ऐसा प्रमुख रासौ ग्रंथ जो डिंगल भाषा में रचित
है - गिरधर आसिया का सगत रासौ
एकमात्र ऐसा प्रमुख रासौ ग्रंथ जो राजस्थान के ब्राह्मण
साहित्य का प्रमुख अंग/ग्रंथ है - नरपति नाल्ह
का बीसलदेव रासो
राजस्थानी साहित्य में ब्राह्मण साहित्य के दो प्रमुख
ग्रंथ - बीसलदेव रासौ व कान्हड़दे प्रबंध
राजस्थानी साहित्य की कौनसी प्राचीन विद्या गद्य-
पद्य तुकांत रचना होती है - वचनिका
राजस्थानी साहित्य की गद्य विधाएं - ख्यात, वात,
विगत, विगत, वंशावली, हाल, हकीकत, दवावैत
राजस्थानी साहित्य की पद्य विधाएं - रासौ, वेलि,
निसाणी, वचनिका
राजस्थानी भाषा में गद्य में लिखा गया सबसे प्रसिद्ध
साहित्य है - ख्यात
मुहणौत नैणसी मारवाड़ के जसवंतसिंह प्रथम के
दरबारी व दीवान थे।
महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण का जन्म बूंदी जिले में हुआ था।
राजस्थानी भाषा शब्दकोश के जनक है - सीताराम लालस
केसरीसिंह बारहठ द्वारा प्रसिद्ध
क्रांतिकारी रचना ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ किस शासक के
द्वारा लिखी गई थी - मेवाड़ महाराणा फतेहसिंह
19वीं शताब्दी में राजस्थान में राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-
प्रोत लेखन का प्रारंभ किससे माना जाता है/आधुनिक
राजस्थानी काव्य के नवजागरण के पुरोधा कवि है -
सूर्यमल मिश्रण
पृथ्वीराज राठौड़ किस नाम से साहित्य रचना करते थे -
पीथल
वेलि क्रिसन रूक्मणी के रचयिता - पृथ्वीराज राठौड़
वेलि क्रिसन रूक्मणी री टीकाकार - जैतदान
सूर्य मल मिश्रण बूंदी शासक महाराव रामसिंह हाडा के
दरबारी थे।
वीर विनोद के रचयिता कविराज श्यामलदास मेवाड़
महाराणा सज्जनसिंह (शंभूसिंह) के दरबारी थे।
राजस्थान थ्रू द एजेज के लेखक - नाथूराम खड़गावत
(राजस्थान में 1857 की क्रांति का व्यापक
अध्ययनकर्ता)
राजस्थान के किस प्रसिद्ध साहित्यकार व इतिहासकार
को ब्रिटिश सरकार द्वारा केसर-ए-हिंद की उपाधि से
सम्मानित किया गया - महामहोपाध्याय कविराज
श्यामलदास
कवि बिहारी मिर्जा राजा जयसिंह के दरबारी थे।
राजस्थान में डाॅ. तेस्तितोरी का संबंध किस क्षेत्र से था -
चारण साहित्य
अजमेर हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रेप्टिव तथा हिंदु
सुपीरियरिटी आदि प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक थे - अजमेर
के राय बहादुर हरविलास शारदा
जब महाराणा प्रताप ने भावावेश में आकर अकबर के समक्ष
आत्मसमर्पण हेतु पत्र लिखना चाहा तो किस कवि ने उनमें
आत्मविश्वास पैदा कर ऐसा करने से रोका था - पृथ्वीराज
राठौड़
राजस्थानी भाषा में रामायण के रचयिता - संत हनवंत
किंकर
चारणी गद्य साहित्य (डिंगल साहित्य) के दो सबसे महान
साहित्यकार (इतिहासकार) - बांकीदास व दयालदास
कह दो आ डंके री चोट, मारवाड़ नहीं रह सी ओट कविता के
रचयिता - जयनारायण व्यास
ढोला मारू रा दूहा राजस्थानी लोक साहित्य
की कौनसी विधा है - लोक काव्य
डिंगल का हैरोस - पृथ्वीराज राठौड़
इला न देणी आपणी, हालरियो हुलराय; पूत सिखावै पालणै,
मरण बड़ाई माया प्रस्तुत दोहा पंक्ति किस प्रसिद्ध
रचना की है - सूर्यमल्ल मिश्रण की वीर सतसई
19वीं शताब्दी के प्रारंभ में राजस्थान में इतिहास लेखन
का प्रारंभ किससे माना जाता है - कर्नल जेम्स टॉड
20 वीं सदी में राजस्थान के इतिहास लेखन
की परंपरा आरंभ करने वाले राजस्थानी इतिहासकार - पं.
गौरी शंकर हीराचंद ओझा
राजस्थानी गद्य साहित्य के अमर लेखक बांकीदास
की ऐतिहासिक बातों का संग्रह - सिंढायच
मुंडियार री ख्यात को राठौड़ा री ख्यात
भी कहा जाता है जिसके लेखक है - दयालदास
8 वीं शताब्दी में संस्कृत भाषा में रचित शिशुपाल वधम
नामक महाकाव्य के रचयिता महाकवि माघ राजस्थान
की विभूति है जो भीनमाल के निवासी थे।
कान्हड़दे प्रबंध के रचयिता महाकवि पदमनाभ जालोर के
शासक अखेराज सेानगरा के दरबारी थे।
राजस्थानी साहित्य के अमर लेखक बांकीदास
मारवाड़ध्जोधपुर महाराजा मानसिंह के व दयालदास
बीकानेर महाराज रतनसिंह के दरबारी थे।
विधवा जीवन पर लिखी गई रचना हूं गौरी किण
पीव री के लेखक है - यादवेंद्र शर्मा चंद्र
हिंदी में सर्वप्रथम भारतीय लिपी का शास्त्र लेखन
करने वाले राजस्थान के सुप्रसिद्ध इतिहासकार - पं.
गौरीशंकर हीराचंद ओझा
विजयदान देथा द्वारा रचित
बाता री फुलवारी की प्रमुख विशेषता है -
राजस्थानी लोककथाओं का संग्रह
किस ग्रंथ के 5वां वेद व 19वां पुराण कहा गया है -
पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा रचित वेलि क्रिसन
रूक्मणी री को
करौली के यदुवंशी शासकों का वर्णन करने
वाला रासौ ग्रंथ - नल्लसिंह भट्ट का विजयपाल रासौ
रणथंभौर के राव हमीर की विजयों का विस्तृत विवरण
देनों वाला ग्रंथ है - हमीर महाकाव्य
सुमेल युद्ध का वर्णन करने वाली ख्यात जोधपुर की ख्यात
है जिसके लेखक थे - मुरारीदान
राजस्थान के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध रचना व सबसे
महत्वपूर्ण कृति हैध् सबसे प्रथम रचना - कर्नल जेम्स टॉड
की "एनल्स एंड एंटीक्विटीज आफ राजस्थान" (2 खंडों में)
कर्नल जेम्स टॉड की प्रसिद्ध कृति एनल्स का प्रथम
खंड 1829 में व द्वितीय खंड संन 1832 में प्रकाशित हुआ।
एनल्स के प्रथम खंड में राजपूताने की भौगोलिक
स्थिति राजपूतों की वंशावली व मेवाड़ रियासत
का इतिहास है।
विग्रहराज चतुर्थ द्वारा रचित हरिकेल नाटक के कुछ
अंश ढाई दिन का झौंपड़ा नामक मस्जिद
की दीवारों पर उत्कीर्ण है।
आयो इंगरेज मुलक रै उपर काव्य रचना के लेखक थे -
बांकिदास
गुलिस्तांरू शेखसादी द्वारा लिखे गये इस ग्रंथ को अलवर
महाराजा विजयसिंह ने जवाहरातों की स्याही से
लिखवाया था।
राजस्थान का गजेटियर - मारवाड़ रा परगना री विगत
जोधपुर का गजेटियर - नैणसी री ख्यात
राजस्थान के जैसलमेर जिले में प्रचलित
लोकवार्ता (प्रेमाख्यान) है - मूमल
राजस्थान का कौनसा प्रसिद्ध ऐेतिहासिक ख्यात
अधूरा है - नैणसी की ख्यात
कलीला-दमना - मेवाड़ शैली की कहानी के दो पात्र
राजस्थान की कौनसी जाति विभिन्न जातियों के
वंशक्रम को अपनी बहियों में सुरक्षित रखती है - भाट
राजस्थानी लोक साहित्य में किस जाति का सबसे
महत्वपूर्ण योगदान है - चारण
राजस्थानी भाषा साहित्य में पवाड़ा - वीरों के विशेष
कार्यों का वर्णन करने वाली रचना अर्थात लोक गाथाएं
राजस्थानी संस्कृति का गढ है - राजस्थानी साहित्य
राजस्थान के महान कवि, इतिहासकार व साहित्यकार
चंदबरदाई का वास्तविक नाम था - पृथ्वीभट्ट
राजस्थान का सर्वाधिक प्रसिद्ध लोक काव्य - ढोला मारू
रा दूहा
राजस्थानी भाषा की सबसे पहलीध्सबसे प्राचीन रचना -
वज्रसेन सूरी की भरतेश्वर बाहुबलि घोर
संवतोल्लेख वाली प्रथम
राजस्थानी रचना पहली तिथियुक्त राजस्थान रचना -
शालिभद्र सूरि की भरतेश्वर बाहुबलि रास
वचनिका शैली की प्रथम सशक्त रचनाध्सबसे प्राचीन
वचनिकाध्चारण शैली की प्रथम रचना किसे
माना जाता है - शिवदास गाडण द्वारा रचित अचलदास
खींची री वचनिका
ख्यात शैली की प्रथम रचनाध्सबसे प्राचीन ख्यात -
मुहणौत नैणसी री ख्यात
राजस्थानी भाषा का प्रथम उपन्यास - शिवचंद
भरातिया का कनक सुंदर
आधुनिक राजस्थानी भाषा की प्रथम की काव्य कृति -
चंद्रसिंह बिरकाली द्वारा रचित बादली
राजस्थान में पाया जाने वाला सबसे प्राचीन साहित्य -
ब्राह्मण साहित्य
राजस्थान का प्रथम हिंदी गद्य निर्माता, प्रथम
हिंदी उपन्यासकार व प्रथम पत्रकार - बूंदी के
मेहता लज्जाराम शर्मा
राजस्थानी भाषा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण व सर्वाधिक
विशिष्ट साहित्य - चारण साहित्य
कान्हड़दे प्रबंध को वीर रस का राजस्थानी महाकाव्य
कहा जाता है।
राजस्थान में जन्मे प्रसिद्ध संस्कृत महाकवि - माघ
राजस्थानी भाषा के प्रथम उपन्यासकार, नाटककार व
कहानीकार - शिवचंद भरातिया
संस्कृत भाषा में रचित ब्राह्मण साहित्य राजस्थान में
पाया जाने वाला सबसे प्राचीन साहित्य है।

Itihaskar of Raj.

राजस्थानी साहित्य से संबंधित प्रमुख
साहित्यकार / Important Writers
Related to Literature of Rajasthan
सूर्यमल्ल मिश्रण: बूंदी जिले के हरणा गांव में चारण कुल
में जन्मे सूर्यमल मिश्रण बूंदी के शासक महाराव रामसिंह
हाड़ा के दरबारी कवि थे। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध
रचना वंश भास्कर है। जिसमें
बूंदी के चौहान शासकों का इतिहास है। इनके
द्वारा रचित अन्य ग्रंथ वीर सतसई, बलवंत विलास व छंद
मयूख है। वीर रस के इस कवि को रसावतार कहा जाता है।
सूर्यमल मिश्रण को आधुनिक राजस्थानी काव्य के
नवजागरण का पुरोधा कवि माना जाता है। ये अपने अपूर्व
ग्रंथ वीर सतसई के प्रथम दोहे में ही समय पल्टी सीस
की उद्घोषणा के साथ ही अंग्रेजी दासता के विरूद्ध
बिगुल बजाते हुए प्रतीत होते है।
एल.पी. तेस्सितोरी: इटली के प्रसिद्ध भाषा शास्त्री डाॅ.
एल.पी. तेस्तितोरी 19141 में राजस्थान (बीकानेर) आए।
बीकानेर महाराजा गंगासिंह ने इन्हे राजस्थान के चारण
साहित्य के सर्वेक्षण एवं संग्रह का कार्य सौंपा था जिसे
पूर्ण कर इन्होने अपनी रिपोर्ट दी तथा राजस्थानी चारण
साहित्यः एक ऐतिहासिक सर्वे
तथा पश्चिमी राजस्थानी व्याकरण नामक पुस्तकें
लिखी। बीकानेर इनकी कर्मस्थली रहा है। बीकानेर
का प्रसिद्ध म्यूजियम इन्ही की देन है।
कर्नल जेम्स टॉड: इग्लैण्ड निवासी जेम्स टाॅड वर्ष
1917-18 में पश्चिमी राजपूत राज्यों का पाॅलिटिकल एजेंट
बनकर उदयपुर आए। इन्होने 5 वर्ष तक राजस्थान
की इतिहास विषयक सामग्री एकत्र की एवं इग्लैंड
जाकर वर्ष 1829 में "एनल्स एंड एंटीक्विटीज आफ
राजस्थान" नामक ग्रंथ लिखा जिसका दूसरा नाम सेंट्रल
एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स आॅफ इंडिया है। इस
रचना में सर्वप्रथम राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ। कर्नल
जेम्स टॉड को राजस्थान के इतिहास लेखन
का पितामह माना जाता है।
बांकीदास ने अपनी कविताओं में
अंग्रेजी की अधीनता स्वीकार करने वाले राजपूत
शासकों को फटकारा था।
कन्हैयालाल सेठिया: चुरू जिले के सुजानगढ कस्बे में जन्मे
सेठिया आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिंदी व
राजस्थानी लेखक है। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य
रचना ‘पाथल व पीथल’ है। (पाथल राणाप्रताप को व पीथल
पृथ्वीराज राठौड़ को कहा गया है) सेठिया की अन्य
प्रसिद्ध रचनाएं - लीलटांस, मींझर व धरती धोरा री है।
विजयदान देथा: देखा की सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं
साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त
कृति ‘बांता री फुलवारी’ है जिसमें राजस्थानी लोक कथाओं
का संग्रह किया गया है। राजस्थानी लोकगीतों व कथाओं
के शोध में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
कोमल कोठारी: राजस्थानी लोकगीतों व कथाओं आदि के
संकलन एवं शोध हेतु समर्पित कोमल
कोठारी को राजस्थानी साहित्य में किए गए कार्य हेतु
नेहरू फैलोशिप प्रदान की गई। कोमल
कोठारी द्वारा राजस्थान की लोक कलाओं, लोक संगीत एवं
वाद्यों के संरक्षण, लुप्त हो रही कलाओं की खोज एवं
उन्नयन तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने
हेतु बोरूंदा में रूपायन संस्था की स्थापना की गई।
सीताराम लालस: सीताराम लालस राजस्थानी भाषा के
आधुनिका काल के प्रसिद्ध विद्वान रहे है।
राजस्थानी साहित्य में सीताराम लालस की सर्वाधिक
महत्वपूर्ण उपलब्धि राजस्थानी शब्दकोश का निर्माण है।
मणि मधुकर: मणि मधुकर
की राजस्थानी भाषा की सर्वाधिक प्रसिद्ध
कृति पगफेरो है।
रांगेय राघव: राजस्थान के रांगेय राघ देश के प्रसिद्ध
गद्य लेखक रहे है। इनके प्रसिद्ध उपन्यास घरोंदे,
मुर्दों का टीला, कब तक पुकारूं, आखिरी आवाज है।
यादवेंद्र शर्मा ‘चंद्र’: राजस्थान के उपन्यासकारों में
सर्वाधिक चर्चित उपन्यासकार बीकानेर के यादवेंद्र
शर्मा चंद्र ने राजस्थान की सामंती पृष्ठभूमि पर अनेक
सशक्त उपन्यास लिखे। उनके उपन्यास ‘खम्मा अन्नदाता’
‘मिट्टी का कलंक’ ‘जनानी ड्योढी’ ‘एक और
मुख्यमंत्री’ व ‘हजार घोड़ों का सवार’ आदि में
सामंती प्रथा के पोषक राजाओं व जागीरदारों के अंतरंग के
खोखलेपन, षडयंत्रों व कुंठाओं पर जमकर प्रहार किये गए
है।
राजस्थानी भाषा की पहली रंगीन फिल्म
लाजराखो राणी सती की कथा चंद्र ने ही लिखी है।
हिंदी भाषा में लिखने वाले राजस्थानी लेखकों में
यादवेंद्रशर्मा चंद्र सबसे अग्रणी है।
चंद्रसिंह बिरकाली: ये आधुनिक राजस्थान के सर्वाधिक
प्रसिद्ध प्रकृति प्रेमी कवि है। इनकी सर्वाधिक
प्रसिद्ध प्रकृति परक रचनाएं लू, डाफर व बादली है।
चंद्रसिं ह बिरकाली ने कालिदास के
नाटकों का राजस्थानी में अनुवाद किया है।
मेघराज मुकुल सेनाणी व श्रीलाल
जोशी की आभैपटकी राजस्थानी भाषा की लोकप्रिय
रचनाएं रही है।