Wednesday, 25 December 2013

1. गलताजी के बाद रामानंद संप्रदाय की दूसरी महत्वपूर्ण पीठ
कहाँ है ?
सलेमाबाद
जोधपुर
✓​ रेवासा
जालोर
भक्तमाल में रामानंद जी के बारह शिष्य कहे गए हैं
अनंतानंद, सुखानंद, सुरसुरानंद, नरहर्यानंद, भावानंद, पीपा,
कबीर, सेन, धाना, रैदास, पद्मावती और सुरसरी। राजस्थान
में रामानंन्दी संप्रदाय का श्रीगणेश संत
श्री कृष्णदासजी पयहारी ने किया, जो अनन्तानंद जी के
परमशिष्य थे। पयहारी ने गलताजी , जयपुर
( जो तत्समयनाथियों का प्रमुख केन्द्र था ) में
नाथपंथियों को शास्त्रार्थ में पराजित कर
रामानंदी संप्रदाय की पीठ स्थापित की, जो राजस्थान में
प्रमुख पीठ है। पयहारीजी के शिष्य उग्रदासजी नें सीकर के
पास रेवासा में इस संप्रदाय की अन्य पीठ स्थापित की थी।
2. जयपुर के शासक रहे कछवाहा मध्यप्रदेश के नरवर से
आये थे। उस समय लगभग संपूर्ण पूर्वी राजस्थान पर,
यानि चम्बल के पश्चिमी तरफ किस जातीय समूह का शासन
था, जिसके एक शासक के साथ धोखा कर दूल्हा राय
कछवाहा ने अपने राज्य की नींव रखी थी ?
✓​ मीणा
गुर्जर
ब्राह्मण
जाट
जयपुर में प्राथमिक रुप से जागीरदारों का विभाजन 'बारह कोटड़ी 'से
आधारित था, सरदारों में सबसे मुख्य राजपूत कछवाहा थे,
जो राजा के निकट सम्बन्धी होते थे। जयपुर के समीप स्थित आमेर
का किला कछवाहा राजपूतों के गौरवशाली इतिहास का गवाह है।
आमेर की घाटी में मीणाओं को फतह कर उन्होंने जब आमेर
नगरी बसाई तो वहीं एक पहाडी पर उन्होंने भव्य किले का निर्माण
कराया था। वही किला आज आमेर फोर्ट के नाम से विख्यात है।
3. संगम योजना का सम्बन्ध है-
✓​ विकलांगों से
पहाड़ियों से
नदियों से
विधवाओं से
संगम योजना का उद्देश्य  विकलांगों के कल्याण में वृद्धि है।
4. ब्राह्मण और भील पुजारी मिल कर इनकी पूजा करते हैं।
राजसमन्द के केलवाडा के पास रीछडा में इन लोक
देवी का भव्य मंदिर है। ज्येष्ठ शुक्ल
अष्टमी को यहाँ भीलों का विशाल मेला भरता है।
कौनसी देवी हैं ?
✓​ आमजा माता
घेवर माता
बाण माता
सुगाली माता
5. " साँझी लीला" भी किशनगढ़ शैली का प्रतिनिधि चित्र
है , जो निहालचंद ने बनाया था। इस शैली के अन्य
चित्रों "बनी ठनी", "दीपावली चित्र", "चाँदनी रात
की संगोष्ठी" आदि से इस चित्र को अलग करने वाली बात है
-
शुक नासिका
✓​ राधा की पोशाक में कृष्ण
कमान जैसी भवें
मत्स्याकार आँखें
6. जंगी ढोल की तान पर शेर और शिकारी शाम को नृत्य शुरू
करते हैं, जो देर रात तक चलता रहता है। शेर और कोई नहीं ,
रुई लपेटे पुरुष ही होते हैं। बच्चे इस बिखरी रुई
को इकट्ठा कर घर ले जाते है। मानते हैं कि बीमार होने पर
बच्चों के गले में इस रुई का धागा बांधने से बीमारी ठीक
हो जाती है। किस कस्बे में यह स्वांग होता है ?
✓​ मांडल
भिनाय
नसीराबाद
ब्यावर
7. सीता से जुड़े स्थान राजस्थान में कई जगह हैं। बारां में
सीता बाड़ी का स्थान अपने विशाल मेले के लिए प्रसिद्ध है ,
तो इस ज़िले में सीता माता का नाम मशहूर अभयारण्य से
जुड़ा है –
✓​ प्रतापगढ़
बूंदी
बांसवाडा
उदयपुर
8. उन्होंने उम्र भर गांधारी की तरह आँखों पर पट्टी बाँधे
रखी थी। गांधारी अपने पति की अन्धता में सहभागी बनी थी,
परन्तु राजस्थान की इन महिला संत ने पट्टी इस लिए
बांधी थी, ताकि अपने आराध्य कृष्ण के सिवा किसी अन्य
को देखना इन्हें गवारा नहीं था। इन्हें जानते हैं ?
सहजोबाई
ज्ञानमतीबाई
✓​ समानबाई
भूरीबाई
9. मारवाड़ जंक्शन से मावली जंक्शन जब आप रेल से जाते
हैं तो रास्ते में अरावली को पार करना होता है। मारवाड़
को मेवाड़ से जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित
पर्वतीय घाट का नाम क्या है ?
केवड़ा की नाल
✓​ गोरम घाट
रतनपुरा घाट
चीरवा घाट
झीलवाड़ा की नाल , जिसे देसूरी की नालया पगल्या नाम से
भी जाना जाता है, मेवाड़ को मारवाड़ से जोड़ती है। मुगलों के
समय हल्दीघाटी के युद्ध के पश्चात् मुगलों ने अधिकांश
आक्रमण इसी नाल से घुस कर किये। इसके अतिरिक्त मेवाड़
को मारवाड़ से जोडऩे वाली अन्य नाल सोमेश्वर की नाल,
हाथीगुड़ा की नाल, भाणपुरा की नाल (राणकपुर का घाटा),
कामली घाट, गोरम घाट व काली घाटी है।
10. बाणगंगा पर जब अजान बाँध बनाया गया तो, उसके
लिए खोदी गयी मिट्टी के कारण एक छिछला तालाब सा बन
गया। फिर यहाँ पानी भरा तो घने पेड़ उग आये और
पंछियों का बसेरा भी बन गया। पंछियों ने इस जगह का नाम
रोशन कर दिया।
✓​ केवलादेव
रामसागर
तालाबशाही
जमवारामगढ़
11. मंडरायल के किले को ग्वालियर की कुंजी कहा जाता था.
यह किस जिले में स्थित है?
✓​ सवाई माधोपुर
करौली
धोलपुर
बारां
12. थेवा कला में कांच और सोने की जुगलबंदी देखते
ही बनती है। कांच की ज़मीन पर सोने का काम करने वाले
सुनारों को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। इस कला में कांच
का रंग अधिकतर होता है ?
लाल
पीला
सफेद
✓​ हरा
थेवा कला में पहले कांच पर सोने की बहुत पतली वर्क या शीट
लगाकर उस पर बारीक जाली बनाई जाती है, जिसे
थारणा कहा जाता है। दूसरे चरण में कांच को कसने के लिए चांदी के
बारीक तार से फ्रेम बनाया जाता है, जिसे "वाडा" कहा जाता है।
तत्पश्चात इसे तेज आग में तपाया जाता है। फलस्वरूप शीशे पर
सोने की कलाकृति और खूबसूरत डिजाइन उभर कर एक नायाब और
लाजवाब कृति का आभूषण बन जाती है।
13. शासक को भी कोई देशनिकाला देते हैं ? लेकिन
अँग्रेज़ों ने इन सीकर के इन महाशय को चार वर्षों के लिए
1937 में सीकर से बाहर भेज कर
जनता को बता दिया कि असली शासक कौन था –
✓​ कल्याण सिंह
राम सिंह
फ़तेह सिंह
शिव सिंह
14. यह इमारती लकड़ी राजस्थान के दक्षिणी भाग में
मिलती है और अँग्रेजों ने इसके दोहन के लिए रेल लाइनें तक
बिछा दी थी। इसमें मौजूद तेल की खुशबू के कारण दीमक
इससे दूर रहती है।
✓​ सागवान
सेमल
धोक
साल
15. राजस्थान का यह स्थान देहली और मुंबई के ठीक बीच
में होने से यहाँ एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया ने
अपना केंद्र बना रखा है।
उदयपुर
✓​ प्रतापगढ़
जयपुर
कोटा
मुंबई और दिल्ली के हवाई मार्ग के लगभग एकदम बीच में होने
की वजह से प्रतापगढ़ शहर के नज़दीक धरियावद मार्ग पर
'एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया' ने एक 'वी ओ आर
स्टेशन' (वायुयान संकेतक केंद्र) स्थापित किया है. राजस्थान
सरकार ने अप्रैल २०११ में लगभग २ किलोमीटर लंबी,बड़े जेट
विमानों तक के उतरने लायक एक हवाई पट्टी गांव वरमंडल में
( जो मुख्यालय से १२ कि.मी. दूर है ) मंज़ूर की है।
16. इस जाति के लोग खुद को कहते तो हिन्दू हैं , परन्तु
किसी व्यक्ति के मरने पर उसके शव को जलाने की बजाय
गाड़ते हैं। यही नहीं मृतक के मुँह में गंगा जल की जगह शराब
की बूँदें भी डालते हैं !
सहरिया
भील
सांसी
✓​ कंजर
17. सटका शरीर के किस अंग का आभूषण है ?
गला
✓​ कमर
नाक
पैर
18. बलदेव, डालू राम और सालिगराम इस चित्र शैली के
माने हुए कलाकार रहे हैं। बलदेव ने गुलाम अली के साथ मिल
कर प्रसिद्ध चित्र "गुलिस्ताँ" बनाया था, जिस पर उस
समय में एक लाख रुपये खर्च हुए थे। सुनहरे रंगों वाली इस
चित्र शैली को पहचानिए -
मेवाड़ी
बूंदी
मारवाड़ी
✓​ अलवर
19. जयपुर रियासत ने 1924 में एक कानून बनाकर इस
जाति के प्रत्येक परिवार के 12 वर्ष से ऊपर के
स्त्री पुरुषों को नजदीक के पुलिस थाने पर
रोजाना हाजिरी देना अनिवार्य कर दिया था। कभी इस
क्षेत्र के मूल शासक रहे लोगों के लिए यह एक अमानवीय
स्थिति थी। 1946 में जाकर इस कानून से बड़े आंदोलनों के
बाद छुटकारा पाया जा सका था। कौनसी अभागी जाति थी ?
गुर्जर
भील
✓​ मीणा
जाट
20. कांच की तरह पारदर्शी संगमरमर का यह झूमर गुम्बद
से लटकता रहता है। वास्तव में शिल्पी शोभनदेव ने कमाल
ही कर दिया था। पूरे में मंदिर में अर्ध विकसित कमल के
फूलों सी संगमरमर की ऐसी ही कलाकृतियाँ नजर आती हैं।
कहाँ पर देख पाएंगे इस मंदिर को ?
चारभुजा
रणकपुर
✓​ आबू
चित्तौड़
21. विन्ध्य की घाटियों में विचरण करती यह
बकरी आपको राजस्थान के पूर्वी भागों में मिलेगी। प्रदेश
की आकर में यह सबसे छोटी बकरी है , लेकिन काम
चारा खाकर भी यह तुलनात्मक रूप से दूध की मात्रा अधिक
देती है। कौनसी नस्ल की हम बात कर रहे हैं ?
जखराना
लोही
जमनापारी
✓​ बारबरी
22. तलवार की नोक को क्या कहते है ?
✓​ अणी
फाल
बाढ़
मूठ
23. इंदिरा गाँधी नहर के बाईं तरफ की जमीन ऊँची होने से
उस तरफ पानी पहुँचाने के लिए पानी को लिफ्ट
किया जाता है. ऐसी अभी तक सात लिफ्ट नहरें हैं. इनमें
सबसे लंबी नहर है?
वीर तेजाजी नहर
कंवरसेन नहर
✓​ गुरु जम्भेश्वर नहर
जयनारायण व्यास नहर
24. मेगा हाई वे परियोजना के संचालन के लिए गठित
उपक्रम है-
✓​ रिडकोर
रेडा
सिडको
रीको
मेगा हाइवे परियोजना के क्रियान्वन हेतु राजस्थान सरकार एवं
मैसर्स आईएल एंड एफएस के मध्य 50:50 की भगीदारी से एक
संयुक्त उपक्रम रोड इन्फास्ट्रक्चर डवलपमेंट आॅफ राजस्थान
लिमिटेड ( रिडकोर ) की स्थापना अक्टूबर, 2004 में की गई थी।
25. जेलर मगन राज व्यास के कहने पर उम्र कैदी अब्दुल
रहमान और उसके साथियों ने भूख हड़ताल पर बैठे इन
स्वतंत्रता सेनानी की इतनी पिटाई
की कि उनकी पसली ही टूट गयी. पिटाई और तेज गर्मी के
कारण इन्हें आये तेज बुखार और दस्त ने आखिर १९ जून
१९४२ को इनकी जान ही ले ली, क्योंकि निर्दयी शासन ने
उपचार भी नहीं करवाया. कौन थे यह महान सेनानी ?
सागरमल गोपा
जय नारायण व्यास
बीरबल सिंह
✓​ बालमुकुंद बिस्सा
V
K
T

1. बिजोलिया की तरह बेगूं क्षेत्र में भी किसान आंदोलन
काफी प्रभावी रहा था। यहां के गोविन्दपुरा गांव में हुए गोलीकांड में
दो किसान शहीद हुए थे। यह गोली कांड किस वर्ष हुआ था?
1925
✓​ 1923
1935
1913
महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से पहले शुरु हुए बेगूं
बिजौलियां के किसान आंदोलन ने इतिहास में महत्वपूर्ण
अध्याय जोड़ा है। देश की आजादी के लिए बेगूं के किसानों ने
कोड़ों की मार झेली, जेल गए। रूपाजी करपाजी भी कई
यातनाएं सहते हुए शहीद हो गए, लेकिन गुलामी स्वीकार
नहीं की।
2. पिंगल भाषा पर जिस क्षेत्र का असर पड़ा था, वह है-
मालवा
सिंध
✓​ ब्रज
गुजरात
डॉ. तेसीतोरी ने राजस्थान के पूर्वी भाग की भाषा को पिंगल
अपभ्रंश नाम दिया है। उनके अनुसार इस भाषा से संबंद्ध
क्षेत्र में मेवाती, जयपुरी, आलवी आदि बोलियाँ मानी हैं।
पूर्वी राजस्थान में, ब्रज क्षेत्रीय भाषा शैली के
उपकरणों को ग्रहण करती हुई, पिंगल नामक एक भाषा-
शैली का जन्म हुआ, जिसमें चारण- परंपरा के श्रेष्ठ
साहित्य की रचना हुई।
3. करौली ज़िले के हिण्डोन क़स्बे में लाल पत्थर की राज्य
की सबसे बड़ी मंडी है। जहां के कारीगर लाल पत्थर
की मूर्तियाँ भी खूब बनाते हैं। तो यहां का यह हस्त शिल्प
भी कम नहीं है।
मखमल
जूतियाँ
कांच की चूड़ियाँ
✓​ लाख की चूड़ियाँ
4. कलख वृद्ध सिंचाई परियोजना का संबंध किस ज़िले से है?
अजमेर
सवाईमाधोपुर
✓​ जयपुर
भीलवाड़ा
5. राजस्थान के इस गांव में पत्थरों से होली खेलना और खून
बहाना आज भी शुभ माना जाता है।
बालोतरा
सारेगबास
भिनाय
✓​ भीलूड़ा
राजस्थान भर में अपनी तरह की अनूठी एवं दूर-दूर तक
मशहूर पत्थरमार होली आदिवासी बहुल वागड़ के
भीलूड़ा गांव में खेली जाती है जिसमें लोग रंग-गुलाल और
अबीर की बजाय एक-दूसरे पर पत्थरों की जमकर बारिश कर
होली मनाते हैं। इस गांव की युगों पुरानी परम्परा के अनुसार
धुलेड़ी पर्व के दिन शाम को इसका रोमांचक नज़ारा रह-रह
कर साहस और शौर्य का दिग्दर्शन कराता है।
6. स्थानीय भाषा राजस्थान की इस महत्वपूर्ण वन उपज
को ‘टिमरू’ कहते हैं।
बांस
खैर
✓​ तेंदू
महुआ
तेंदू पत्ते से बीड़ी तैयार की जाती है। वागड़
की आबोहवा तेंदू पत्तों के उत्पादन के लिए अनुकूल है।
7. कमला व इलाइची नाम की महिला चित्रकार किस शैली से
जुड़ी थी ?
✓​ नाथद्वारा
मेवाड़
मारवाड़
जयपुर
8. दयाबाई एवं सहजोबाई का संबंध किस सम्प्रदाय से
था ?
रामस्नेही
नाथ
दादू
✓​ चरणदासी
संत चरणदास के परम शिष्यों रामरूप जी ,जोगजीत जी, सरस
मादुरी शरण , सहजोबाई और दयाबाई ने अपनी रचनाओ मे
बार बार गुरुदेव जी का यश गया है | उन्होने गुरुदेव को लोहे
को सोना बना देने वाला परस और बेकार
वृक्षों को अपनी सुगंधी से सुगन्धित कर देने वाला चन्दन
कहा है | सतगुरु के प्रेम मे मगन सहजोबाई ने सतगुरु
को हरी से भी ऊँचा दर्जा दिया है |
9. यह भी ‘बणी-ठणी’ के लिए प्रसिद्ध चित्रकार
निहालचन्द की प्रसिद्ध कृति रही है।
चोर पंचाशिका
रागमाला
✓​ राधा-कृष्ण
गुलिस्तां
किशनगढ़ चित्रशैली का प्रसिद्ध चित्रकार ‘निहालचन्द था,
जिसने प्रसिद्ध ‘बनी-ठणी’ चित्र चित्रित किया।
10. इन्हें बागड़ की मीरां कहा जाता है।
काली बाई
कृष्णा कुमारी
देऊ
✓​ गवरी बाई
संवत् 1815 में राम नवमी के दिन एक नागर ब्राह्मण
परिवार में इस कन्या का जन्म हुआ। साधारण परिवार में
जन्मी इस कन्या का नाम गवरी बाई था जिसे आज इतिहास
में ‘‘वागड़ की मीरा’’ के नाम से जाना जाता है।
11. राज्य की सबसे छोटी बकरी की नस्ल है।
जमनापारी
परबतसरी
✓​ बारबरी
जखराना
12. ‘ कलीला-दमना’ की चित्राकंन परम्परा को मेवाड़ के
शासक संग्राम सिंह द्वितीय ने प्रश्रय दिया था। यह
पंचतंत्र का अनुवाद था, जो स्थानीय शैली में चित्रों के
माध्यम से किया गया था। इसके प्रमुख कलाकार थे -
✓​ नुरूद्दीन
सुरजन
साहिबदीन
रघुनाथ
13. निम्न में से किस खनिज से राज्य सरकार को सर्वाधिक
राजस्व मिलता है ?
मार्बल
लिग्नाइट
तांबा
✓​ सीसा-जस्ता
अलौह धातु सीसा, जस्ता एवं ताबां के उत्पादन मूल्य
की दृष्टि से देश में राजस्थान का प्रथम स्थान है तथा लौह
खनिज टंगस्टन आदि के उत्पादन मूल्य में प्रदेश
का चौथा स्थान बन गया है।
14. सोनामुखी के बेहतर विपणन के लिए विशिष्ट
मंडी कहां स्थापित की गई है
बाड़मेर
सोजत
✓​ जोधपुर
जालोर
फलौदी, जि. जोधपुर में। सोनामुखी का पौधा मूलतः अरब
देशों से भारत में आया है। इसको हिन्दी में सनाय,
राजस्थानी में सोनामुखी कहते हैं। भारत में अधिकतर
इसकी खेती तमिलनाडू में की जाती है। भारत
का सोनामुखी की खेती में विश्व में प्रथम स्थान है। भारत
से प्रति वर्ष तीस करोड़ रुपये से अधिक
की सोनामुखी की पत्तियों का निर्यात किया जाता है।
सोनामुखी की पत्तियों का उपयोग आयुर्वेदिक,
यूनानी तथा एलोपैथिक दवाइयों के निर्माण में
किया जाता है। यह फ़सल हरियाणा के दक्षिण-पश्चिम
भागों में आसानी से उगाई जा सकती है। पूर्णतया बंजर
भूमि में उपजाए जा सकने वाले इस औषधीय पौधे के लिए न
तो ज़्यादा पानी की आवश्यकता होती है तथा न ही खाद
की और न ही किसी विशेष सुरक्षा अथवा देखभल की।
इसको लगाने के उपरान्त न तो कोई पशु आदि खाते हैं। इस
प्रकार हरियाणा के विभिन्न भागों में विशेष रूप से बंजर
भूमि में इस औषधीय पौधे को खेती करके पर्याप्त लाभ
कमाया जा सकता है।
15. झीलवाड़ा की नाल या पगल्या से कौनसे दो ज़िले जुड़ते
हैं ?
नागौर-अजमेर
✓​ पाली-राजसमन्द
डूंगरपुर-उदयपुर
सिरोही-उदयपुर
झीलवाड़ा की नाल , जिसे देसूरी की नालया पगल्या नाम से
भी जाना जाता है, मेवाड़ को मारवाड़ से जोड़ती है। मुगलों के
समय हल्दीघाटी के युद्ध के पश्चात् मुगलों ने अधिकांश
आक्रमण इसी नाल से घुस कर किये। इसके अतिरिक्त मेवाड़
को मारवाड़ से जोडऩे वाली अन्य नाल सोमेश्वर की नाल,
हाथीगुड़ा की नाल, भाणपुरा की नाल (राणकपुर का घाटा),
कामली घाट, गोरम घाट व काली घाटी है।
16. निजी क्षेत्र में पवन ऊर्जा की पहली इकाई
कहां स्थापित हुई थी और कब हुई थी ?
फलौदी 2010
हर्षपर्वत 2005
देवगढ़, 2007
✓​ जैसलमेर, 2001
17. जिप्सम के उत्पादन के लिए आजादी के पहले और आज
भी अग्रणी है।
बाड़मेर
गंगानगर
नागौर
✓​ बीकानेर
18. 2001 की जनगणना और 2007 की पशुगणना में किस
ज़िलों में सर्वाधिक लिंगानुपात, सर्वाधिक पशुधनत्व और
सर्वाधिक हिंदू आबादी का प्रतिशत पाया गया है ?
✓​ डूंगरपुर
जयपुर
बाँसवाड़ा
बाड़मेर
19. हांग-कांग की फोकस एनर्जी नामक कम्पनी हमें गैस
की खोज और उसके उत्पादन में सहयोग कर रही है।
इसको वर्तमान में कौनसा कार्यक्षेत्र दिया गया है।
सांचोर
तनोट
✓​ शाहगढ़
बाधेवाला
वर्तमान में फोकस एनर्जी द्वारा क्षेत्र में उत्पादित
की जाने वाले बैस की सप्लाई रामगढ़ स्थित विद्युत तापीय
गृह को की जा रही है। वर्तमान में 70 लाख क्यूबिक फीट
गैस की सप्लाई हो रही है।
20. ए.जी.जी. राजस्थान में अँग्रेज़ी राज के प्रतिनिधि हुआ
करते थे। उनका कार्यालय प्रारम्भ में अजमेर में था, जिसे
माउन्ट आबू में इस वर्ष स्थानान्तरित कर दिया गया था।
✓​ 1856
1889
1835
1902
21. राजस्थान में सर्वाधिक प्रतिशत किस प्रकार के
वनों का पाया जाता है ?
ढाक वन
सालर वन
✓​ धौंक वन
बांस वन
22. राज्य में तिल के उत्पादन में
अग्रणी ज़िलों का सही अवरोही क्रम है।
पाली, नागौर, अजमेर, जयपुर
✓​ पाली, सवाईमाधोपुर, जोधपुर, करौली
कोटा, करौली, बारां, जयपुर
जयपुर, अजमेर, टोंक, पाली
23. कुड़क, मुरकी, ओगन्या, टोटी व गुड़दा, शरीर के किस
भाग में पहने जाने वाले गहने हैं ?
नाक
✓​ कान
हाथ
गला
24. मूलतः यह नाट्य गायन पठानों की पश्तो भाषा में
होता था। राजस्थान आकर यह यहां के रंग में रंग गया है।
जयपुरी ख्याल
तुर्रा कलंगी
✓​ चारबैत ख्याल
माच ख्याल
25. भपंग किस प्रकार का वाद्य है ?
अवनद्य
सुषिर
✓ धन
तत्
भपंग - तूंबे के पैंदे पर पतली खाल मढी रहती है। खाल के मध्य में
छेद करके तांत का तार निकाला जाता है। तांत के ऊपरी सिरे पर
लकड़ी का गुटका लगता है। तांबे को बायीं बगल में दबाकर, तार
को बाएँ हाथ से तनाव देते हुए दाहिने हाथ की नखवी से प्रहार करने
पर लयात्मक ध्वनि निकलती है।
V
k

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